दिवाली ज़ब भी आती है मुझे बुआ जी के घर बिताये दिवाली के त्यौहार बरबस याद आते है. इतने बरस बीत जाने पर भी वो स्मृति जैसे ताज़ा ही है.

एक जख्मी डॉगी

कल मैंने गोकुल टाउनशिप के गोकुल sephire बिल्डिंग के सामने उधर फुटपाथ की तरफ आगे जा रहे एक डॉगी को देखी जिसकी गर्दन और कान के पीछे का हिस्सा गल गया था वो ज़ख्म से तकलीफ में था भूखा -प्यासा था जिसे मैंने वंही रखे पॉट से पानी पीते देखा और उसकी फोटो ली उसे बिस्कुट देकर उसपर हल्दी लगाई वो डॉगी वाकई में दयनीय हालत में था मैंने फेसबुक के पेज Kavita bhabhi पर पोस्ट और उस डॉगी की pic डाली तो बहुत सी दवा सबने बताये. बिहार से एक dog -लवर ने बताये Amoxirum टेबलेट दूँ और Topicure wound स्प्रे करू उसके घावों पर… मै मेडिसिन लेकर उस डॉगी को देख रही हूँ.


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