क्या आज की सरकार फ़िल्म इंडस्ट्री को नहीं चाहती?


क्या आज की सरकार फ़िल्म इंडस्ट्री को नहीं चाहती?

क्या आज की सरकार फ़िल्म इंडस्ट्री को नहीं चाहती? जबकि फ़िल्म इंडस्ट्री करोड़ों लोगों को रोजगार दे रही है और इससे युवाओं के सपने जुड़े होते है वंही बुजुर्गो की यादें…

किन्तु आजकल जो बॉलीवुड बायकाट का ट्रेंड चल रहा है वो बहुत ही निराशाजनक है और माहौल सिनेमा के अनुकूल नहीं है. इस पर सरकार को सभी से मिलकर बात करनी चाहिए और युवाओं की मनोदशा को समझना होगा कि वो बॉलीवुड से नफ़रत क्यों करने लगा है? कोई भी नकारात्मक माहौल देश के लिए अच्छा नहीं होता है. ये प्रोग्रेस को रोकता है प्रगति में बाधक है.

यदि सुशांत सिँह की मौत को लेकर नाराजी है तो केंद्र सरकार को साफ ये संदेश देना होगा कि उसका इसमें कोई योगदान नहीं है. यदि तत्कालीन महाराष्ट्र सरकार का कोई हाथ है तो केंद्र को आगे आकर सच को सामने लाना चाहिए ताकि देश का युवाओं को सच पता चले और वो आगे बढ़ सके. अतः ये जिम्मेदारी अब केंद्र के पास है कि वो सीबीआई के द्वारा सच का पता लगा कर जनता की जिज्ञासा को संतुष्ट करें ताकि फ़िल्म इंडस्ट्री का बुरा हश्र नहीं हो. क्योंकि सिनेमा एक जरूरी माध्यम है इसके आभाव में अनेक तरह की विकृति समाज में व्याप्त होती है.

आज इतना ही क्योंकि बहुत रात बीत चुकी है मौसम में हल्की ठंड भी महसूस हो रही जिससे मुझे नींद आ रही है और मुझे अब सो जाना चाहिए. इधर मेरे डॉगी को बहुत खुजली होने से कल उसके डॉक्टर को बुला कर उसे इंजेक्शन भी देना होगा. मेरा ध्यान वंही जा रहा है कि मेरा डॉगी बहुत खुजली से परेशान है और मै लगातार टालते जा रही हूँ जैसे भारत सरकार सिनेमा पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे रही है जो अपेक्षित है. 🌹


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