क्यों नशे में डूब रहे है आज के युवा

क्यों नशे में डूब रहे है आज के युवा?

लेख (मौलिक, स्वरचित )

क्यों नशे में डूब रहे है आज के युवा

लेखिका -जोगेश्वरी सधीर

आज कल जो घटना घट रही है वो लोगों को सोचने को विवश कर रही है कि आखिर क्यों आज का युवा नशे में डूब रहा है?क्यों वह कोई काम नहीं करना चाहता? क्या वो निराश है?

जिनके पास बेतहाशा पैसा है सुख -सुविधा है वो क्यों इस तरह की आदतों के शिकार है क्या वजह है? हमने क्या इसपर कोई राष्ट्रीय चिंतन किया है या इस समस्या से आंख मुंदे बैठे है

कुछ युवाओं से बात की तो उनका कहना है ड्रग्स के बिज़नेस में आसानी से पैसा कमा लेते है और ऐसा करते हुए वो भी कश लगाते -लगाते नशे के आदी हो जाते है.

कई कारण है इसके जैसे घर से दूर बड़े शहर में रहते हुए किसी का नियंत्रण नहीं रहता. कोई रोकने -टोकने वाला नहीं रहता तो बड़ी आसानी से नशे की गर्त में गिर जाते है. और ज़ब तक घर वालों कों पता चलता है बाज़ी हाथ से निकल चुकी होती है.

कुछ लोग अपनों के ठुकराये जाने से भी नशे की दुनिया में डूब जाते है. ज़ब कोई अपना हमसफ़र साथ छोड़ जाता है तो भी नशे ले आगोश में खो जाते है.

अपने आप कों भुला देना अपने गम को भूल जाने की आरजू में भी नशे का दामन थाम लेते है.

वंही कुछ लोग धौस जमाने के लिए नशा करते है तो कुछ महफ़िल में शामिल होने नशा करते है.

कुछ को धन का गुमान होता है तो कुछ धन का प्रदर्शन करने नशा करते है.

कुछ लोग यारों का साथ देने यारी -दोस्ती निभाने को भी नशा करते है.

लेकिन इसका अंजाम अक्सर गलत होता है

नशे करने वालों की संगत उन्हें बर्बादी की ओर ले जाती है. जंहा रात -दिन नशा ही नशा होता है वंहा कोई कुछ नहीं सोच पाता और नशे में उलल -जलूल बोलना या गलत काम करना आम बात होती है

नशे में डूबकर सब गलत काम करते है.

कुछ लोग तो चोरी -डकैती कराने भी किसी को नशे में डूबा देते है.

इस तरह नशे की दुनिया नकारात्मकता की दुनिया होती है और नशे का कारोबार गलत लोगों की पहचान बन जाता है.

जो इस दलदल में डूबता है उसका निकलना मुश्किल होता है. किन्तु यदि आपको पता चलता है कि आपका अपना नशे की गिरफ्त में है तो उसे अकेला छोड़ने के बदले मनोचिकित्सक के पास ले जाये. आजकल बहुत अच्छी मेडिसिन निकल गईं है नशे के जाल से मुक्ति दिलाती है. और अपना ध्यान अच्छे काम में लगाए. ऐसे फैशन से दूर रहे जो आपको जेल की सलाखो के पीछे ले जाये.

लेखिका -जोगेश्वरी सधीर

(प्रेषित रचना अप्रकाशित, मौलिक व स्वरचित है )

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