जब टॉमी को खुजली हुई (आपबीती )

जब टॉमी को खुजली हुई (आपबीती )

मेरे घर रेगुलर आने वाले स्ट्रीट डॉग टॉमी को हमारे घर बरामदे में आकर बैठने की आदत है. 

वो रोज सुबह आ जाता और शाम से रात तक सामने बरामदे में बैठकर मुझे किसी एक इंसान के साथ होने का अहसास दिलाता. 

मुझे भी टॉमी का इस तरह से साथ होना आश्वश्त करता था कि कोई हमारे साथ है. 

सामने के हॉल में मेरा पलंग रहता है जंहा मै लिखती -पढ़ती और थक कर सो जाती. 

वंही सामने दीवाल के पास टॉमी बैठा जैसे मेरे अकेलेपन को महसूस ही नहीं होने देता. 

इस तरह हमारे दिन अच्छे बीत रहें थे कि एक दिन मैंने महसूस किया कि टॉमी बेहद कमजोर हो गया है और उसके बाल भी झड़ गए है. 

फिर मुझे लगा मेरे हाथ -पैरों में खुजली भी महसूस होने लगी. मै खुजाते हुए परेशान हो गई. 

गौर से देखने पर पता चला कि टॉमी को खुजली वो चुकी है. उसे स्किन में फंगल इन्फेक्शन से चमड़ी लाल हो रही थी, और वो बहुत ज्यादा खुजाने लगा था. वो वंही उसी कमरे में बैठा रहता तो मुझे भी उसके कीटाणु ने खुजली करना शुरू कर दिया था.

तब पूछने पर मेरी सहेली ने बताई कि तुम उसे बाहर कर दो. बहन भी बोली कि उसे कमरे में मत आने दो. 

मुझे उसे हटकने में बड़ी पीड़ा हुई वो भी नहीं समझ पाया कि मै क्यों भगा रही हूँ और वो उस रात चले गया. 

मुझे कई बार नींद खुली तो टॉमी की कमी महसूस हुई. अगले दिन सुबह वो आया तो मैंने उसे बड़े प्यार से चाय दी. पर फिर उसकी खुजली से डरकर उसे दोपहर को भगा दी. 

उसे आते -जाते देखती तो पाती कि वो बहुत बुरी तरह से खुजला रहा है और उसकी चमड़ी से खून बह रहा है. मुझे बहुत दया आई तब मैंने उसके पीने के लिए इन्फेक्शन रोकने की दवा बुलाई और उसे दूध में देने लगी. 

भगाने पर भी वो सुबह से शाम तक हॉल में आकर बैठे रहता. मुझे भी उसे यूँ ही अकेले छोड़ने का मन नहीं हुआ. बहुत अकेलापन लगने लगा. 

तब जी कड़ा कर मैंने उसे मलहम लगाना शुरू किया. हाथ से नारियल तेल में कपूर मिला कर लगाई और भगवान से प्रार्थना की कि टॉमी की खुजली ठीक कर दो. 

और सच में दवा पिलाने और लगाने से अच्छे परिणाम मिले. उसके ज्यादा काले बाल आ गए और चमड़ी का रंग भी सामान्य हो गया. 

मैंने दवा ज़ारी रखी. अब टॉमी बहुत स्वस्थ होने लगा है. वो बड़े शांति से दवा लगा लेता है. 

मुझे ख़ुशी है कि भगवान ने मेरी प्रार्थना सुन ली और टॉमी अब पहले की तरह होने लगा है. आखिर वो हमारी फैमिली का मित्र व साथी है इस बीमारी में मै निष्ठुर होकर उसे कैसे निकाल सकती थी. 

मै भगवान का शुक्रिया अदा करती हूँ जब भी उसे आराम से हॉल में सामने बैठे देखती हूँ. 

लेखिका जोगेश्वरी सधीर 


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