स्कूल के दिनों की यादें

जिंदगी के सफर की शुरुआत से.

जिंदगी के सफर की शुरुआत हुई स्कूल से ज़ब मैंने रेडिओ पर प्यारे नगमे सुने और फिल्मों से प्यार हो गया तभी से ये नन्हा सपना लिए चल रही हूँ और उम्र के इस पड़ाव पर भी वंही सपना आज भी आँखों से दूर नहीं हो रहा है क्या करूँ अपने फिल्मों के लिखने और बनाने के सपने का?


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