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जीवन के अनसुलझे रहस्य

Jogeshwari sadhir sahu

मेरे लिए मेरे पति आज एक रहस्य बन गये है क्योंकि जीते जी उन्हें नहीं समझ सकी अब जब उनके बक्से को खोलती हूँ तो रोज ही जैसे नये रहस्य पता चल रहे है.

पति के साथ उनके जीवन में मेरी ज्यादा नहीं बनती थी पर मै चाहती थी वो स्वस्थ रहे इसके लिए उनके खान -पान को लेकर मेरी उनसे अक्सर कहा -सुनी भी हो जाती थी.

किन्तु जीवन बड़ा विचित्र है इंसान नहीं समझ पाता कई बार अपने साथ वाले को कि उसके दिल पर क्या बीत रही होंगी?

पति का जीवन जितना संघर्षपूर्ण था वो उतने ही जिन्दा दिल थे और बहुत ही शान की जिंदगी जी उन्होंने.

नौकरी के शुरुआत में वो अपने प्रतियोगिता परीक्षा में व्यस्त रहे हमेशा अपने नौकरी के काम के बाद अपनी पढ़ाई में भिड़े रहते थे.

उनका जीवन किसी के लिए भी प्रेरणा से कम नहीं हो सकता. Psc की परीक्षा की तैयारी और भी कई परीक्षा को वो देखते थे. घर में अच्छी पत्रिकाओं और अख़बार के ढेर लगे रहते थे. उन्हें अलग ही धुन थी.

शुरू के दिनों में उनकी अलग ही ठसक थी बढ़िया शूट पहनते अच्छे अध्ययन का तेज उनके चेहरे की चमक को बढ़ा देता था.

बड़े खुशमिजाज थे थकते नहीं थे कितना ही काम करते. पहले तो अपने घर की जमीन के लिए कोर्ट का खर्च उठाये दौड़ -धूप करते रहे पर ज़ब उन्हें उनके ही भाई ने बेवकूफ बना दिया तब उनके दिल को बड़ा झटका लगा था.

बैतूल में रहने के दिनों में उन्हें सभी जानते और बुलाते थे वो भी सब जगह जाते सबसे मिलते और सामाजिक काम में अपनी उपस्थिति दर्ज कराते थे.

उन्होंने अपने पिता को बड़ा सम्मान दिया और काका भाई को भी उन्होंने बहुत महत्व दिया उन लोगों को अपना ही मानकर हर सामान खरीद कर देते थे पर ज़ब उन्हीं लोगों ने उनका सबकुछ छीन कर उन्हें भगा दिया तो मेरे पति की तो जैसे दुनिया ही लूट गईं. वो अकेला महसूस करने लगे. जिंदगी उन्हें एक के बाद दूसरे झटके दे रही थी. कितना सहते तब धार में रहते उन्हें लकवे का पहला अटैक आया तब अकेले ही सब जगह गये थे और उन्होंने अपना इलाज किया था. सरकारी ही नहीं प्राइवेट दवा से भी उन्हें फायदा हुआ.

बड़े धुन के पक्के और बात के धनी थे. चार लोगों के बीच रहकर हमेशा जोरों से बात करना जाति में सभी लोगों को लेकर चलना उनकी खूबी थी.

कई बार बहुत सारी घटना घटती है और उसे समझ ही नहीं पाते क्योंकि दिमाग़ चकरा जाता है कि क्या हो रहा है इसपर कुछ भी नहीं सोच पाते.

जिंदगी में ऐसा ही होते चले गया कि मै कुछ भी नहीं समझ सकी उस इंसान को जो इतना अच्छा था और उससे दूर भागते रही जिससे वो बेहद अकेले होकर टूटते चले गये.

उन्हें मुझसे दूर करने में कई लोगों ने भूमिका निभाई जिनमें एक उनके पिता और दूसरे एक आदमी था जिसकी ओर मेरा झुकाव हो गया था पर वो आदमी गंदा था और उसने मेरा शोषण किया.

मेरे पति कितने ज्यादा अकेले हो गये थे कि वो बाद में बहुत ही सादगी और विनम्रता से रहने लगे थे. जीवन के हर दुख को स्वीकार करने लगे थे. उन्होंने किसी से कुछ भी नहीं चाहा बस जैसे भी हालात होते स्वीकार लेते थे.

एक इतने सच्चे इंसान से मै इसलिए दूर भागती रही कि मै शरारीक रिलेशन से बच रही थी और इसी वजह से उनके स्वास्थ्य पर बेहद बुरा असर पड़ा. वो हर तरह से अकेले होते चले गये.

अपने दोस्तों से बातें करते थे फोन पर तो पूछते -कौन मरा कौन बचा?

मै नाराज होती कि ये कैसी बात कर रहे है. पर वो आखिर तक यंही जरूर पूछते थे.

कई बार कहते कि मेरे सभी दोस्त मर गये कहते मेरे साथ के सब चले गये. तब मै कहती -अभी आपकी उम्र कंहा हुई है इतनी जो ऐसी बात करते है वो नगपुरे जी को देखो कैसे साइकिल चलाते हुए घूमते है.

अब ज़ब चले गये तो हर बात याद आती है बहुत पछतावे से मन भर जाता है कि उनकी सेवा और कर लेती क्यों नहीं समझा कि जाने वाले है.

कई बार नहीं समझता कि क्या हो रहा है क्यों हो रहा है और कैसे हो रहा है? हम कुछ भी अंदाज नहीं लगा पाते और दिमाग़ चकरा जाता है क्योंकि जो घट रहा होता है उससे हम भी कुछ नहीं समझ पाते.

आगे के बारे पता नहीं होता इसलिए सबकुछ रहस्य ही रह जाता है इंसान साथ रहकर चले जाता है हम कुछ भी समझ नहीं पाते और जिंदगी यूँ ही निकल जाती है बीत जाती है अपनों को समझे बिना वक़्त का दौर गुजर जाता है ज़ब समझ आती है तो समय जा चुका होता है.

बहुत सारी बातों पर अफ़सोस होता है कि मैंने ऐसा क्यों नहीं की या ऐसा करना था या वैसा करना था क्यों कुछ भी नहीं सुझा यंही तो जिंदगी का अनसुलझा रहस्य है.

जीवन में बहुत सारे लोग आते -जाते है मिलते और बिछड़ते है पर हम नहीं समझ पाते कि वो क्यों मिले उनसे लड़ाई -झगड़ा और खुन्नस क्यों हुई हमने तो ऐसा सोचा नहीं था.

यदि हमें इतनी समझ आ पाती या अंदाज हो जाता तो वैसा नहीं होता जो हुआ और हमें पछताना पड़ा कि ऐसा क्यों हो गया? यंही जिंदगी का रहस्य होता है जो आखिरी क्षण तक पता नहीं चलता वरना हम वैसा नहीं होने देते और हमेशा सचेत हो जाते.

उन्होंने रात देखा न दिन बड़ी मेहनत करते थे कष्ट सहते थे आज हमें उनकी मेहनत और निष्काम कर्म की सीख ही काम आयेगी हम मेहनत करके उनके नाम को बढ़ाएंगे और अपनी प्रोग्रेस करेंगे.

(मेरे पति स्वर्गीय श्री नामदेव साहू की याद में )

Jogeshwari sadhir sahu

Virar w मुंबई

Jogeshwarisadhir@gmail.com

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