I often remember Bhru.

देशी श्वान

देशी स्वान या गली के कुत्ते (ब्लॉग )

हमारे देश में ही ऐसा होता है कि न तो लोग देशी या राष्ट्र -भाषा की कद्र करते है न ही देशी नस्ल के कुत्तों की.

हमेशा विदेशी कुत्तों या डॉगी को ही पालते है.

देशी कुत्तों को कोई नहीं चाहता सब उन्हें भगाते है.

ज़ब मैंने एक औरत से बालाघाट में बहुत मिन्नत की थी कि एक नन्हा मासूम पप्पी की माँ मरने से वो अकेले हो गये थे 4पप्पी थे पर एक बहुत ही कमजोर था कुछ खाता नहीं था वे इधर -उधर खाने को भटकते थे पर लोग उन्हें कुछ नहीं देते इतने मासूम बच्चों के सामने बासा बिगड़ा चावल डाल देते.

वो बेचारे मासूम पप्पी सुबह से खाने के लिए इधर -उधर भागते पर ह्रदयहीन लोग उन्हें कुछ नहीं देते. वो मासूम भटकते हुए मर गये. एक बड़े कुत्ते ने उनपर हमला किया जो सबसे तेज पप्पी था उसका पेट फाड़ दिया. छोटे कमजोर मासूम पप्पी को पता चल गया तो वो खाना छोड़ कर धूप में बैठ गया और मर गया. मैंने उसी के लिए एक औरत से बहुत मिन्नतें की थी कि उसे रख लो जिससे उसे जिंदगी और प्यार मिलेगा.

पर विदेशी नस्ल के कुत्तों की दीवानी वो औरत अपनी बेटी के साथ विदेशी पोमेरियान को तलाशती रही. ये पप्पी अपने भाई के मारे जाने पर खाना -पीना छोड़ कर मर गया.

वो सारे पप्पी अपनी माँ के ठंड में जकड़ के मर जाने से मारे गये उन उन्हें खाने नहीं देता था उनका शेल्टर भी टूट गया था बड़े कुत्ते उनके पीछे लगे थे और एक ने उस तेज जाँबाज को मार दिया वो दिन कितना मनहूस था.

बालाघाट में मैंने यंही सब देखा और मैंने छोड़ दिया फिर वो निष्ठुर शहर क्योंकि लोग वंहा दया नहीं करते.

यंहा भी देशी कुत्तों से लोग नफ़रत करते है.

क्रमशः

जोगेश्वरी सधीर @कॉपी राइट 

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