नया साल नई चुनौती

नया साल नई चुनौती

लेख -जोगेश्वरी सधीर

कल रात ज़ब नव -वर्ष का जश्न मना रहे थे तब चेन्नई में बाढ़ जैसे हालात थे.2दिन की बारिश ने जलभराव की स्थिति ला दी थी. ये सब बहुत ही शाकिंग था दिल को धक्का लगा था इस खबर को देखकर.

आखिर कौन था इन हालातों के लिए जिम्मेदार यंही विचार मन में आने लगा.

एक ओर ओमिक्रोन का भय दूसरी ओर जलवायु परिवर्तन की विभीषिका इंसान को चैन नहीं लेने दे रहे है.

कोई कह नहीं पा रहा कि इसका दोषी कौन है? किन्तु गहनता से विचार करने पर यंही समझ आ रहा है कि स्वयं मनुष्य इन हालातों का जिम्मेदार है.

मनुष्य द्वारा किये कार्य ही जिन्हे वो प्रोग्रेस कहता है आज धरती को आहिस्ते से खत्म कर रहे है और अब वो प्रक्रिया तेज हो रही है.

जंगलों के काटे जाने से जीवन उपयोगी और इस धरा हेतु महत्वपूर्ण समस्त वनस्पति एवं परिस्थितिकी नष्ट हो गईं. वे माहौल जो आनंद की सृष्टि करते थे खत्म होने लगे.

जीव -जंन्तु, पौधे व जल के स्त्रोत खत्म हो गए उनकी जगह बहुत ही गंदे नर्क जैसे नदी -नाले प्रदूषण और गंदगी से लबालब भर गए.

पूरी धरती एक कूड़ा घर बना दी गयी जिसमें पॉलीथिन का कचरा जीव -जंतुओं के लिए जानलेवा था. लेकिन इनसे जो परिस्थिति बनी है वो अब इंसान को जीने नहीं दे रही है.

कोरोना और जलवायु परिवर्तन ने इंसान का जीना दुभर किया है हतूफान का कहर है और कूड़ा बढ़ते जा रहा है.

वंही बहुत बहुमूल्य जीव -जंन्तु और वनस्पति सब कुछ कुछ नष्ट हो रहा है जो इस धरती को जीवनदायी और स्वर्ग तुल्य मनोहारी बनाता था.

लेख -जोगेश्वरी सधीर द्वारा

मौलिक, स्वरचित एवं अप्रकाशित

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