sabhar फोटोशॉप

फोटोशॉप

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अपने लेखन जीवन मे अपेक्षित सफलता नहीं मिलने से मै स्क्रिप्ट राइटिंग के लिए मुंबई आई. यंहा एक डायरेक्टर ने मुझसे रूम दिलाने के नाम पर मुझसे 27000/ रु ट्रांसफर करा लिए अपनी बीबी के अकाउंट मे. ज़ब उसने मुझे रु नहीं दिलाया तो मेरे दिल को धक्का लगा. 

इस झटके से उबरने और मुंबई मे अपने समय के सदुपयोग के लिए मैंने फोटोशॉप की क्लास ज्वाइन की. जंहा उम्रदराज होने के बावजूद इंस्टिट्यूट वालों ने मुझे हाथों -हाथ लिया. और मुझे बहुत प्रोत्साहित किया सना व रेशमा मैडम तथा हिमांशु सर ने. 

मै मुंबई शहर वालों के इस प्रेम -स्नेह से अभिभूत हूँ. जंहा एक कथित डायरेक्टर ने मुझसे 27000/ रु की ठगी की वंही पर यंहा रहने वाली भाभी ने मुझे घर का खाना खिलाया और मुझे घर से दूर रहने के अहसास को दूर की. 

मै सभी की आभारी हूँ. जो कहते है कि बड़े शहर मे तो कोई किसी को पूछता नहीं ये धारणा गलत साबित हो गई. मुझे इस शहर ने एक भाई -भाभी दिए. एक इंस्टिट्यूट ने मुझे मेरा बचपन का उत्साह लौटा दिया. मै अपने भीतर बहुत उत्साह और ऊर्जा पाती हूँ. अपने स्कूल के दिनों को फिरसे पा सकी हूँ. 

ज़ब अपने इस इंस्टिट्यूट मे आई थी तो क्लास मे 20-30 युवा छात्र थे जो जय माता दी, कहकर चिढ़ाते थे. पर ये सब हमें एक हल्का -फुल्का मनोरंजन ही देते थे. मैंने इसे बुरा नहीं मानी. 

सना मैम ने मुझे नई जानकर एक नया फ़ेकल्टी दी. यंहा के सभी लोग बहुत अच्छे है. ये एक बहुत प्यारा शहर है और यंहा की जीवटता अनोखी है जिंदगी का जज़्बा कूट -कूट कर भरा है. 

मुंबई सभी को बहुत कुछ देती है जीने का आश्रय व साधन देती है. मुझे भी काम मिलेगा. इसी आशा से मै प्रातः उठकर भगवान का शुक्रिया करती हूँ जिसकी कृपा मुझपर अविरल रुप से इस उम्र मे भी बरस रही है. 

जोगेश्वरी सधीर साहू 


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