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स्टोरी -बदले की आग -1

रवि और रेखा का शादीशुदा जीवन ठीक नहीं है रवि खिलन्दड़ शख्स है जो अपनी टूरिंग जॉब का फायदा उठा कर बाहरी जीवन और संबंधों का लुत्फ़ उठाता है इसमें वो इतना मस्त हो जाता है कि अपनी बीबी रेखा पर ध्यान नहीं देता जिससे रेखा दुखी रहने लगती है और उसकी सेहत गिर जाती है.
रेखा अपने पति के बाहरी संबंध से ज़ब परेशान होकर झगड़ती है तो रवि उसे मारपीट करता है और उसपर ज्यादा ध्यान नहीं देता.उनका मासूम 8साल का बेटा पारस बचपन से मम्मी -पापा के झगड़े देखकर एकाकी और कुंठित होने लगता है. पर रवि और रेखा अपने ईगो में उलझ कर अकेले होते जा रहें पारस पर ध्यान नहीं देते.
ऐसे में रेखा अपने को लेखन कार्य में व्यस्त करती है जिससे उसे सुकून मिलता है. इसी साहित्य लेखन के दौरान पत्र के द्वारा तब रेखा का धीरज से परिचय प्रगाढ़ होता है रेखा धीरज के रसूख से प्रभावित होकर उसे चाहने लगती है लेकिन वो सिर्फ प्रेम करती है जिसका फायदा धीरज उठाता है और वो उसे धीरे -धीरे शरारीक संबंध बनाने के पत्र लिख कर उसे उतप्रेरित करता है.
रेखा धीरज को भगवान की तरह चाहने लगती है और वो धीरज को सिर्फ प्रेम और दोस्ती की ही बात करती है. लेकिन कुटिल धीरज उसे शरारीक शोषण की ओर ले जाता है और एक दिन उसे बाहर घूमने ले जाकर उससे संबंध बना लेता है जिसे रेखा का मासूम बेटा पारस देखता है जो सिर्फ 8-9साल का है और पारस के मन में कई तरह की कुंठा और गुस्सा जन्म लेता है जिसे वो दबाता है तो बढ़ती उम्र में और ज्यादा अकेला हो जाता है.
इधर धीरज शोषण करके भाग जाता है किन्तु रेखा उसे सच्चा दोस्त समझती है जबकि वो एक लम्पट कामुक और घिनौना आदमी है. बाद में धीरज नई जगह शादी कर लेता है और रेखा फिर से अपने जीवन में एकाकी हो जाती है.
लेकिन पारस जो बड़ा हो रहा है इन सबसे इतना आहत होता है कि वो युवा होते ही साइज़ोफ्रीनिया का शिकार हो जाता है तब रेखा को अपनी गलती का अहसास और पछतावा होता है और वो अपने बेटे को ठीक करना चाहती है लेकिन मानसिक बीमारी साइज़ोफ्रीनिया बढ़ जाने से पारस अपनी जाति, धर्म और रिश्तेदारों से नफ़रत करने लगता है.
शेष भाग -2में
(अगली कहानी -नफ़रत की आग )
टाइटल बदले की आग इसलिए है कि अपने पति के बाहरी संबंधों से जल -कुढ़ कर रेखा एक गैर -मर्द से रिलेशन करती है वो सिर्फ पवित्र प्रेम करना चाहती है लेकिन उसका कथित नकली कामुक प्रेमी? उसका यौन -शोषण कर शादी कर लेता है और रेखा अकेले डिप्रेस्ड हो जाती है उसका बेटा साइज़ोफ्रीनिया जैसी गंभीर बीमारी का शिकार हो जाता है रेखा पति से बदला लेने उसी की राह पर चल पड़ती है गृहस्थी की राह और पवित्रता से भटक जाती है जिसका गलत और गंभीर असर उसके growing son पर पड़ता है और रेखा अपने बहकने पर पछताती है लेकिन जवानी में की इस गलती का परिणाम उसे अधेड़ उम्र में भुगतनी पड़ती है.
इसलिए इसका नाम बदले की आग है जिससे रेखा का स्त्रित्व, सतित्व और पवित्रता नष्ट हो जाती है और एक जहीन बेटे का जीवन खराब हो जाता है.
राइटर -जोगेश्वरी सधीर साहू

jogeshwari जंक्शन
Mon, Oct 3, 2022, 12:35 AM


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