Struggle

स्ट्रगल &एकाग्रता (concentration)

मेरे लेखन का स्ट्रगल बहुत लम्बा हो गया और ये जिंदगी भर चल रहा है मै निराश हो सकती थी पर नहीं हूँ क्योंकि मुझे अपने काम की समझ है वह मेरे भीतर से है जिसे मै लगाव से करती हूँ मुझे अपना काम बोझ या बर्डन नहीं लगता वह मुझे पसंद है और मेरे मन का है.

मेरे मूवी लिखने के संघर्ष में इतनी लम्बी प्रतीक्षा है मैंने 2004में वो अवसर खो दिया था ज़ब कोई मेरी स्क्रिप्ट मनमौजी खरीदना चाह रहा था 60000/रू में और मैंने उसे मना कर दिया 1लाख रू मांगे. उसके बाद से मेरे कितने 1लाख चले गये मै ही जानती हूँ मेरा दिल उस मूर्खता भरी जिद पर कितना पछताता है. मै अभी भी उस स्क्रिप्ट को पढ़ती हूँ जो मुझे बहुत अच्छी लगती है. लास्ट year वो स्क्रिप्ट मुझसे स्वीटी नामक एक लड़की ने ले ली थी उसने राज शांडिल्य के ऑफिस में वो स्क्रिप्ट एक आदमी को दिला दी फिर वो आदमी कभी नहीं मिला और स्वीटी मुझे घुमाते रही कई महिनों तक आज… कल कह कर टरकाती रही फिर मै गांव चले आई. मेरी full script वंही रह गईं थी मुझे आज भी उस घटना पर रंज है और मन में दुखी रहती हूँ हमेशा ही.

कॉपी राइट @jogeshwarisadhir


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