साथी जो पीछे छूट गए...

साथी जो पीछे छूट गए…

जोगेश्वरी सधीर साहू

मेरे साथी मेरे डॉगी मेरे pups वे सब जो बालाघाट में पीछे छूट गए नहीं मालूम किस दुनिया में मिलेंगे कब मिलेंगे हाँ!मैंने उनसे वादा तो किया है कि मिलूंगी कब कैसे नहीं मालूम?

मेरे लिए बालाघाट छोड़ना जरूरी हो गया था वंहा पारधी मास्टर की बीबी, भिलावे की बीबी और भटेरे की बीबी ये सब मुझे नापसंद करते थे उनकी सभा -गोष्ठी इसी पर होती थी कि मुझे कैसे हटाया जाये.

मेरी उस जगह पर कोई इज्जत नहीं थी. भटेरे नामक शख्स ने हमें बहुत नुकसान पहुंचाया था. एक रिटायर सिपाही का बेटा गुंडागर्दी और रंग दारी करता था. पुलिस की चोरों से साँठ -गांठ थी. जाति विशेष के लोगों को विशेषधिकार प्राप्त थे वे समस्त परियोजना का पैसा लूट कर महल बनाकर ऐश कर रहे थे बाकि उनकी जवाबदारी कुछ नहीं थी. बहुत ज्यादा निकम्मापन और भ्र्ष्टाचार का बोलबाला था. सभी अपने में मस्त थे.

ऐसे माहौल में जंहा लोग जातिवाद में और अपने मतलब में आकंठ डूबे थे वो पसंद नहीं करते थे लोगों में देश या समाज की भावना नहीं थी. कुछ लोग हिंदुत्व के नाम पर खूब पैसा बना रहे थे सबके अपने संघ थे जमीन माफिया का वर्चस्व था.

ऐसे अंधेर नगरी में मै चली गईं जंहा लोग जबरदस्ती से शिव लिंग पर जल चढ़ा कर उन्हें परेशान करते यदि कोई भूखा -प्यासा पप्पी मिलता तो वो उसे पानी देना पसंद नहीं करते.

भूखे जानवरों से नफ़रत करना कुत्तों को लावारिस कहना उन्हें बरछी मारना ये सब बालाघाट के हरिओम नगर वालों का मनोरंजन था. मेरे सामने गोगलाई से आने वाले ज़ालिम मजदूरों ने पत्थर से सिर फोड़ कर मारा था. वो मासूम पप्पी भूखा -प्यासा रहता था जिसे मैंने देखा आखिरी वक़्त पागल होकर दुखी होकर मरते हुए. ये मजदूर बदमाश गुंडे थे जिन्हे विधायक की जाति के लोगों ने प्रश्रय दिया और मासूम कुत्तों के पिल्लो को जहर देकर मार दिया गया.

ये लोग एक ज़ालिम विधायक की जाति के है उन्हीं का मोहल्ला उन्हीं की सरकार उन्हीं का थाना सब कुछ उनका था और फिर मेरे उपर उनका कहर टूटा भयंकर रूप से मुझे चिढ़ाना मुझे अपशब्द कहना और अश्लील टीका -टिप्पणी ये सब इन लोगों के वो हथियार थे जिसे वो लोग चला रहे थे.

बालाघाट का अंडर वर्ल्ड है दौने और ब्रह्मे जो किसी को भी चाहे तो कॉलेज से निकाल सकते है बालाघाट पूरी तरह माफिया लोगों के कब्जे में है और वे लोग यंहा की मलाजखंड खदानों से लेकर भरवेली माइंस तक लूट पाट और आतंक मचाये हुए है लोग गुलामों की तरह पानी भरते है और बेबस रहते है. विधायक के सामने सांसद की कोई औकात नहीं है.

ऐसी जगह में जंहा कोई क़ानून -कायदा नहीं था लोग लालच में पागल थे और दिखावा करके भगवान को खुश कर रहे थे ऐसे लोगों के बीच मासूम कुत्तों को खिलाना मेरे और कुत्तों दोनों के लिए मुसीबत की घंटी बन गया.

बालाघाट शहर के अंदर का माहौल अच्छा है क्योंकि जो जैन -मारवाड़ी रहते है वो धार्मिक है और जनसेवा में रूचि रखते है उन्हीं व्यापारियों के कारण बालाघाट में रौनक़ रही है. कांग्रेस के वक़्त भी जो टेम्भरे और गौतम फैमिली रही है प्रोग्रेसिव रही है लेकिन अब नई सरकार में धार्मिक उन्माद चरम पर पहुंच गया भ्रष्टाचार भी हद से ज्यादा हो गया लोग संघ वालों को सारे अधिकार और लाभ देने लगे. सरकार मुंह देखकर काम करती.

नई सरकार ने शासन नहीं करने की नीति अपनाई. विधायक के यंहा लोग पैसे लेकर काम कराने जाने लगे और वो थाने व कलेक्टर को धमकी देकर राज चलाने लगा. राज -काज की कोई मर्यादा नहीं रही अब.

वो दिन याद आते है ज़ब बहुत मुश्किल से वक़्त काटी सभी लोग मुझे देखकर बोलते नहीं थे और मै अकेले थी हमारा परिवार अकेले पड़ गया था तब कुत्तों ने मेरा साथ निभाया. वे डॉगी मुझे अजीज हो गए. मै इस थ्योरी पर यकीन करने लगी कि राम ने जंगल में रावण से लड़ने वानर सेना बनाई होंगी.

तब वो घृणा का कारोबार करने वाले नफ़रती लोग मेरे डॉगी से नफ़रत कर उन्हें जहर देने लगे भिलावे से लेकर बोपचे तक सभी उनके साथी और गोगालाई गांव के गुंडे मजदूर मेरे pups को पत्थर के बाद जहर से मारने लगे.3को मार डाला तब मैंने रोते हुए बालाघाट छोड़ने का फैसला किया.

मेरे रोने की वो गंदी औरतें उन बदमाश मजदूरों के साथ नकल करती और तब मै डॉयल 100को कॉल करती तो मेजर शुक्ला मुझे आकर डांटता कि हम क्या करें? घर के भीतर रहने कहता.

टेम्भरे नामक माइंस वाला आदमी अपना घर बना रहा था उसके मजदूरों ने मुझे उस जगह से घर बेचने मजबूर कर दिया. बोपचे पारधी, भटेरे और ऐसे ही बदमाश लोगों ने टेम्भरे के साथ मुझे उन लोगों ने झूठी कम्प्लेन करके फंसाना चाहा जबकि मेरी कम्प्लेन पहले हुई थी इस तरह से उन लोगों ने सिर्फ इसलिए मुझे भगा दिया कि मै कुत्तों को रोटी देती थी उन्हें बिस्कुट देती थी तो कहते देखो!ये औरत कुत्तों की सेवा करती है. भयानक साकेत, विजयेंन्द्र और जीतेन्द्र नामक गुंडों को पारधी और टेम्भरे ने मेरे उपर छोड़ दिया था जो मेरी इज्जत लूटने की बात कर मेरे घर के सामने से भूखी नज़रों से देखते हुए गुजरते तो मुझे दरवाजा लगा देना पड़ता था.

मेरे डॉगी और pups की याद आ रही है जिन्हे मै खाने देती तो दौड़ते आते थे जिन्हें मैंने भयानक बरसात में मरने से बचाई. धूप से बेहाल होते तो उन्हें मैंने पानी से नहला दिया था. आज याद आते है. एक पिल्ली जो पानी में भीगकर आखिरी सांस गिन रही थी उसे वापस लाई थी घर में रखी थी पेड़े खिलाई थी वो बड़े प्यार से आती थी. सभी बड़े प्यारे थे प्यार का मतलब समझते रिस्पांस देते थे. मै आने वाली थी मैंने देखी कि पिल्ली बिस्कुट लेकर अब गांजर घास के झुरमुट में छुप कर खाती है एक और उसका भाई भी उस झुरमुट में उसके साथ छिप जाता है इस तरह वे गर्मी से अपना बचाव करते है देख मुझे राहत हुई.

पिल्ली मेरे घर आई तो मैंने उसे लाड़ करके उसके माँ और झुण्ड में पहुंचा दिया क्योंकि मै जानती थी कि वो सब इधर आएंगे तो मजदूर और जल्लाद टेम्भरे की औरत उन्हें जहर देगी. इसलिए उन्हें समझा दिया इधर मत आना.

मेरे आने पर कौन उन्हें बिस्कुट और तोस देगा? एक लड़का बोला -ये सब भूखे मरेंगे..

तब गुस्से से मेरे दिल से निकला था -तू भूखे मरेगा..

हमारे पप्पी मुझे सपने में दिखते रहे सब आते है सपने में मेरी राह तकते है कमजोर है पर कमजोर नहीं.3महीने के है पर वो सब मुझे कंही दूर भगवान के घर मिलेंगे. वो सब गोबर, डायपर और मिट्टी खाते होंगे. भुरू मेरे बिना पागल की तरह इधर से उधर दौड़ता होगा सब बैठकर मेरी राह ताकते होंगे. मै दुखी होकर उन्हें याद करती हूँ और उनसे फिर मिलूंगी कंही या अगले जन्म में या भगवान के घर यंही सोचती हूँ. बहुत ध्यान व प्रार्थना करती हूँ और सोचती हूँ काश!अपने उन सारे पिल्लो और कुत्तों को मै यंही से कुछ खाने दे पाती.

जैसे पत्थर से पानी नहीं मिल सकता वैसे उन निर्दयी लोगों से आशा नहीं कर सकती कि वो मेरे छोड़े हुए कुत्तों को कुछ रोटी या पानी देंगे. हे प्रभु!उन मासूम बेजुबानो पर रहम कर. वर्ना ऐसी आग आसमान से नहीं बरसती यदि इंसान थोड़ा सा भी दयालु हो सकता.

जोगेश्वरी सधीर साहू


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